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अंगोला में आयोजित होने वाले नेचरल डायमंड प्रमोशन पर आयोजित राउंडटेबल में भाग लेगा जीजेईपीसी

मुंबई 19 जून 2025: जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC), जो भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग की शीर्ष संस्था है, 18 जून 2025 को अंगोला की राजधानी लुआंडा में आयोजितनेचरल डायमंड प्रमोशन में आयोजित राउंडटेबल में भाग लेगा।

भारत का प्रतिनिधित्व इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच परश्री शौनक पारिख, उपाध्यक्ष, GJEPC, औरश्री सब्यसाची राय, कार्यकारी निदेशक, GJEPC, करेंगे। उनकी उपस्थिति भारत की उस निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है जो नेचरल डायमंड उद्योग कोरेसिलिएंट, ट्रांसपेरेंटऔर सस्टेनेबल बनाए रखने के लिए है।

इस उच्चस्तरीय सम्मेलन का आयोजन मिनलर रिसोर्सेज, पेट्रोलियम अंगोला के खनिज संसाधन, पेट्रोलियम एवं गैस मंत्रालय (MIREMPET)द्वारा किया जा रहा है। इसमें बोत्सवाना, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका, सिएरा लियोन और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे अग्रणी हीरा उत्पादक देशों के मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा, वैश्विक हीरा मूल्य श्रृंखला के प्रमुख हितधारक भी इसमें भाग लेंगे।

इस बैठक की अध्यक्षता अंगोला के खनिज संसाधन, पेट्रोलियम और गैस मंत्रीमाननीय डायमंटिनो अज़ेवेदोकरेंगे।

ऱाउंडटेबल का उद्देश्य प्राकृतिक हीरा उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना तथासाझा विपणन रणनीतियों और समवेत कथानकोंके माध्यम से हीरों की दुर्लभता, सुंदरता और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को उजागर करते हुए उनके प्रचार-प्रसार की रणनीति तैयार करना है।

सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्षलुआंडा समझौता” (Luanda Agreement) होगा, जो एक संयुक्त घोषणापत्र के रूप में सरकारों और उद्योग जगत के नेताओं की उस प्रतिबद्धता को दोहराएगा, जिसके तहत नेचरल डायमंड हीरों की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया जाएगा और उत्पादक देशों तथा समुदायों पर उनका दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित किया जाएगा।

GJEPC की इस राउंडटेबल में भागीदारी, नेचरल डायमंड आपूर्ति श्रृंखला में भारत की केंद्रीय भूमिका और इस उद्योग के भविष्य को आकार देने वाले वैश्विक संवादों में उसकी सक्रिय सहभागिता को रेखांकित करती है।

 

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के बारे में

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी), वाणिज्य मंत्रालय, भारत सरकार (जीओआई) द्वारा 1966 में स्थापित की गई थी। यह भारत सरकार द्वारा शुरू की गई कई निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) में से एक है। इसका उद्देश्य देश के निर्यात को बढ़ावा देना है, जब भारत की स्वतंत्रता के बाद की अर्थव्यवस्था ने अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कदम रखना शुरू किया था। 1998 से, जीजेईपीसी को स्वायत्त दर्जा दिया गया है। जीजेईपीसी रत्न एवं आभूषण उद्योग का शीर्ष निकाय है और आज इस क्षेत्र में 10700 से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है। मुंबई में मुख्यालय के साथ, जीजेईपीसी के नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, सूरत और जयपुर में क्षेत्रीय कार्यालय हैं, जो सभी उद्योग के प्रमुख केंद्र हैं। इस प्रकार इसकी पहुँच व्यापक है और यह सदस्यों के साथ सीधे और अधिक सार्थक तरीके से सेवा करने के लिए उनके साथ घनिष्ठ संपर्क स्थापित करने में सक्षम है। पिछले दशकों में, जीजेईपीसी सबसे सक्रिय ईपीसी में से एक के रूप में उभरी है और अपनी प्रचार गतिविधियों में अपनी पहुंच और गहराई का विस्तार करने के साथ-साथ अपने सदस्यों के लिए सेवाओं को व्यापक और बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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